दास्तां-ए-ज़िंदगी

नमस्कार, आदाब, सत्श्रियाकाल.....
मित्रों....
मैं हूं नवाबी, सेठ नवाबी.....
इस नाम को पढ़कर आप सभी हैरान हुए होंगे,  क्योंकि आज तक शायद आप में से किसी ने भी ऐसा नाम ना सुना होगा ना पढ़ा होगा।
दोस्तो मुझे पता है कि मेरे लिखने का तरीका आप सबको कुछ अजीब सा लग रहा होगा, मगर यकीन कीजिए, ये सभी वो शब्द हैं जो हम बिना सोचे समझे लिख रहे हैं, क्योंकि अक्सर सोच समझकर काम करने वाले लोगों को बेकार समझा जाता है और बिना सोचे समझे काम करने वालो को समझदार.....
खुद के बारे में क्या लिखूं, क्या बताऊं आप सबको अपने बारे में समझ में नहीं आ रहा, मगर एक कोशिश ज़रूर करेंगे कि आप सबको खुद से रूबरू करा सकें.........

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