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ज़िंदगी "एक पहेली"

ज़िंदगी.... कितनी अजीब है न....? कभी दोस्त बनकर मुश्किलों से लड़ना सिखाती है तो कभी दुश्मन बनकर मुश्किलों को ही बढ़ाती है.... गर मेहरबां हो जाए तो ग़म की परछाईं भी पास नहीं आती, मगर रूठ जाए तो आंसुओं के सैलाब में पूरी उम्र डूब जाती है। ज़िंदगी...., एक गुरु भी है, जिसका सिखाया हुआ हर सबक हमारे लिए आने वाली मुश्किलों को आसान करने में मदद भी करता है। खैर, देखा जाए तो हर इंसान के लिए इसके अलग-अलग मायने हैं....अंजाम हैं और मक़ाम भी अलग-अलग ही हैं....। मेरे लिए....ये ज़िंदगी, जैसे एक पहेली बनकर खुद मेरे साथ खेल रही है। जिस किसी भी रस्ते पर कदम बढ़ाता हूं.... अक्सर मुझे किसी नई पहेली में फंसाकर मुझ पर हंसने लगती है, मानो मुझसे कह रही हो कि तुम्हे इस हालत में देखकर अच्छा लग रहा है....। यकीन मानिए, ज़िंदगी के ऐसे पहलुओं को देखकर मेरे मन में अक्सर बहुत से सवाल आने लगते हैं कि आखिर क्यूं मेरे नसीब में इतने दर्द और ग़म लिखे गए हैं? क्यूं मुझे खुशियों के लिए तरसना पड़ता है? क्यों.....? कभी कभी सोचता हूं कि आख़िर कितनी ज़ोर से चीखूं कि मेरे सारे ग़म सबको सुनाई दे? मगर क्या करूं, ऐसा करके भी कोई फायद...

बेमौसम बारिश

ये बेमौसम बारिश......उफ्फ! कितना परेशान करती है। देर रात साढ़े तीन बजे से पूरे एरिया की लाइट गई हुई है, अभी तक कोई अता-पता नहीं है कि कब आएगी। बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर बात की तो वहां से भी कोई अच्छा जवाब ना मिला कहने लगे कि आपके क्षेत्र में बारिश की तेजी को देखते हुए लाइट की सप्लाई रोक दी गई है, जैसे ही बारिश बंद होगी वैसे ही आपके क्षेत्र की लाइट की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी, तब तक आपको इंतजार करना पड़ेगा। ये सुनकर और भी ज्यादा गुस्सा आने लगा कि ऐसी बेमौसम बारिश का क्या फायदा कि कहीं आना-जाना भी ना कर सको, सारे काम छोड़-छाड़ कर बस घर में ऐसे ही बैठे रहो। दोपहर का वक़्त शुरू होने वाला है, सुबह के बारह बजने वाले हैं। अभी और कितना इंतजार करना पड़ेगा लाइट आने का? ये सब सोच सोचकर मन ही मन गुस्सा हो रहे थे हम। इस बेमौसम बारिश की वजह से पिताजी आज अपने ऑफिस नहीं जा पाए, माताजी रोजमर्रा के काम नहीं कर पा रहीं, और बड़े भैया, वो अपनी दुकान नहीं जा पा रहें हैं। ख़ैर इस बीच बड़े भैया का फोन बजा और दुकान के ग्राहक इस बेमौसम बारिश में भी सामान खरीदने के लिए उनसे निवेदन करने लगे और बड़े भैया भी ...

नई उम्मीद

कभी कभी जब आप खुद को बहुत ज्यादा हारा हुआ महसूस करते हैं, अक्सर उसी वक़्त एक नई उम्मीद की चिंगारी आपके अंदर पैदा होती है। कुछ लोग इस चिंगारी को भुला देते हैं, तो कभी कभी लोग इस चिंगारी को आग बना लेते हैं। ये फ़ैसला ख़ुद करना होता है कि आप क्या चाहते हैं। ज़िन्दगी में बड़े मुकाम को हासिल करने के लिए हर किसी को एक उम्मीद की तलाश होती है, आज हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ। ख़ुद को खोया हुआ महसूस कर रहे थे, मगर किसी ने हमें उम्मीद की रोशनी दिखाई है, बस अब उस रास्ते पर आगे बढ़ने की हिम्मत करनी है हमें, क्योंकि अगर ऐसा नहीं करेंगे, तो ख़ुद को शायद फिर से खो देंगे हम, और ऐसा कुछ भी होना हमें मंज़ूर नहीं...........

मिज़ाज़-ए-नवाबी

दोस्तों, कभी कभी, ऐसा भी हो जाता है, कि जब हम कुछ लिखने के लिए कलम उठाते हैं तो अक्सर लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं। समझ में नहीं आता कि कहां से शुरू करूं.... कहने को तो बहुत कुछ होता है मेरे मन में, जिसे मैं बयां करना चाहता हूं, मगर लफ़्ज़ हैं कि वो बाहर नहीं आना चाहते.... ऐसे में खुद पर गुस्सा भी आता है और हैरानी भी होती है। कभी कभी तो आंसू भी आ जाते हैं इन आंखो में। मगर, इस वक्त तो खुद पर हैरानी हो रही है, क्योंकि लफ़्ज़ तो कम थे, फिर भी इतना सब कुछ कैसे लिखा हमने आप सबके लिए? ये....एक अजनबी सी पहेली ही है, मेरे लिए............

दास्तां-ए-ज़िंदगी

नमस्कार, आदाब, सत्श्रियाकाल..... मित्रों.... मैं हूं नवाबी, सेठ नवाबी..... इस नाम को पढ़कर आप सभी हैरान हुए होंगे,  क्योंकि आज तक शायद आप में से किसी ने भी ऐसा नाम ना सुना होगा ना पढ़ा होगा। दोस्तो मुझे पता है कि मेरे लिखने का तरीका आप सबको कुछ अजीब सा लग रहा होगा, मगर यकीन कीजिए, ये सभी वो शब्द हैं जो हम बिना सोचे समझे लिख रहे हैं, क्योंकि अक्सर सोच समझकर काम करने वाले लोगों को बेकार समझा जाता है और बिना सोचे समझे काम करने वालो को समझदार..... खुद के बारे में क्या लिखूं, क्या बताऊं आप सबको अपने बारे में समझ में नहीं आ रहा, मगर एक कोशिश ज़रूर करेंगे कि आप सबको खुद से रूबरू करा सकें.........